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आदमी आदमी का बीएफ

आदमी आदमी का बीएफ, आज्जि अपनी बात बोल कर सबका चेहरा देखने लगा. उसे लगा कि इस बात से शायद सबका शादी की ज़िद करना बंद हो जाएगा. लेकिन उसकी इस बात का जबाब सेलू ने जबाब देते हुए कहा. कीर्ति बोली ओये, अब मस्का लगाना छोड़ो और ये बताओ कि, तुम आज दिन भर सोए क्यो नही. तुम्हे तो आज से रात को हॉस्पिटल मे रुकना था ना. यदि तुम अभी 7 बजे तक जाग रहे हो तो, फिर रात को हॉस्पिटल मे कैसे रुकोगे.

ये हॉस्पिटल अजय के पिताजी का सपना था और इस सपने को शेखर भैया के नाम पर कर देने से, ना तो अजय के पिताजी की आत्मा को शांति मिलेगी और ना ही शेखर भैया की आत्मा को कोई खुशी होगी. इस सलवार सूट मे वो बेहद सुंदर, प्यारी और मासूम लग रही थी. मेहुल तो उसे ऐसे देख रहा था, जैसे की पहली बार वो प्रिया को देख रहा हो. तब तक वो चल कर हमारे पास आकर खड़ी हो गयी और फिर से अपनी मुस्कुराहट बिखेरते हुए, उसने हमसे कहा.

मैं बोला दीदी, मुझसे ये नही हो पाएगा. मैं इस समय दीदी का सामना नही कर पाउन्गा. मैं उन्हे रोते हुए नही देख सकता. आदमी आदमी का बीएफ मैं बोला अरे तू रोने क्यू लगी. मैं तो सिर्फ़ मज़ाक कर रहा था. मैं जानता हूँ कि तेरी तबीयत सच मे खराब थी. सुबह मौसा जी ने मुझे सब कुछ बता दिया था.

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  1. मोहिनी आंटी की इस बात को सुनकर, राज उनको ऐसी बात बोलने के उपर से गुस्सा करने लगा. मगर उस से ज़्यादा गुस्सा नितिका को आ गया. उसने तो सारा घर ही सर पर उठा लिया और मोहिनी आंटी को अपनी माँ मानने से ही इनकार करते हुए उल्टा सीधा बकने लगी.
  2. कीर्ति बोली शिखा दीदी का ऐसा सोचना भी सही है. लेकिन मौसी का कहना भी ग़लत नही है. वो चाह कर भी इस शादी मे शामिल नही हो सकती. रही मेरे आने की बात तो, अभी मेरी तबीयत कुछ ठीक सी नही है. इसलिए मैं सफ़र नही कर सकती. सेक्सी नंगे सेक्सी
  3. अजय की बात सुनकर भी दोनो ने अनसुना कर दिया और गेट से अंदर जाने लगी. लेकिन अजय ने गेट पर हाथ रख कर, दोनो को अंदर जाने से रोकते हुए कहा. मैं बोला प्रिया, तुम क्यो परेशान होती हो. मैं जब आउगा तो मेहुल या निक्की को जगा लुगा. तुम बेकार मे परेशान मत हो और आराम करो.
  4. आदमी आदमी का बीएफ...मेरी बात को सुनकर अमन के घर वाले उसे मुंबई भेजने को तैयार हो गये. मेरे दादा जी ने भी अमन को कह दिया कि, वो यदि चाहे तो मुंबई मे हमारे बंग्लो मे भी रह सकता है. उस दिन अमन की खुशी का ठिकाना ही नही था. बरखा की इस बात के जबाब मे, मेहुल उसे सारी तैयारियाँ दिखाने लगा. जिसे देख कर बरखा ने भी राहत की साँस ली और फिर सब अंदर चले गये. उनके जाने के बाद, हम सब फिर से अपने काम मे लग गये.
  5. मुझे शिखा दीदी के साथ बातों मे लगा देख कर, राज बाहर चला गया. शिखा दीदी ने मुझसे खाने का पुछा तो, मैने बताया कि, खाना हम लोग वहाँ से खा कर आए है. बरखा का शरीर आत्लीट था और ये सच था कि, यदि वो उन मे से किसी का हाथ भी पकड़ लेती तो, सब मिलकर भी बरखा से उसका हाथ नही छुड़ा पाती. इसलिए सब ने वहाँ से भाग जाने मे ही अपनी भलाई समझी थी.

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छोटी माँ बोली बात तो तुम्हारी सही है. मैं भी यहाँ सबके साथ आना चाहती थी. लेकिन एक घरेलू वजह से मेरे अलावा किसी का आना नही हो सका. लेकिन अगली बार मैं ज़रूर सबको साथ लेकर आउगि.

मैने उसे समझाने के लिए वापस फोन किया. लेकिन उसने फोन नही उठाया. फोन चाची जी ने उठाया. मैने उनसे अर्चना से बात करवाने को कहा तो, अर्चना ने फोन पर आने से मना कर दिया. एक पल के लिए निक्की को ऐसे देख कर, मुझे कीर्ति की याद आ गयी और मैं निक्की के इस रूप मे खो सा गया. निक्की ने इस तरह से मुझे अपनी तरफ देखते पाया तो, मुस्कुराते हुए मुझे आँख मार दी.निक्की की इस हरकत से मैं सकपका गया और इधर उधर देखने लगा.

आदमी आदमी का बीएफ,ये कहते हुए मैने बरखा दीदी के हाथ को झटका और बाहर की तरफ दौड़ लगा दी. मेरे पिछे पिछे मेहुल, राज और बाकी लोग भी आने लगे. वही मुझे दरवाजे से बाहर निकलते देख, सलीम की नज़र मुझ पर पड़ गयी.

राज इस समय दिमाग़ से काम ले रहा था. लेकिन मेरा दिमाग़ इस समय छुट्टी पर गया हुआ था. इसलिए मैने उसकी बात को काटते हुए कहा.

ऐसा क्यों होता था, इस बात को मैं कभी समझ नही सका. लेकिन मेरे साथ भी प्रिया को लेकर, एक ऐसी ही अजीब बात जुड़ी हुई थी. वो बात ये थी की, प्रिया चाहे अपने दर्द को, अपनी हँसी के पिछे छुपाने की लाख कोसिस कर ले. मगर फिर भी मुझे उसकी मुस्कान के पिछे छुपि खुशी और गम का अहसास हो जाता था.मी पाहिलेला अपघात प्रसंग लेखन मराठी

मगर मैने ऐसा करने से मना करते हुए कहा कि, ये मेरी तरफ से नही बल्कि मेरी मोम की तरफ से है और शिखा दीदी को इस सब से कोई परेशानी है तो वो खुद ही मेरी मोम से बात कर लेगी. मेरा काम सिर्फ़ मोम का गिफ्ट दीदी तक पहुचाना है. शायद शिखा दीदी उनसे ही भाग कर उपर आई थी. लेकिन जब उन्हो ने उनको भी अपने पिछे उपर आते देखा तो, वो जल्दी से आकर बरखा के पिछे खड़ी हो गयी. उन्हे इस तरह से च्छुपते देख, बरखा ने शिखा दीदी से पुछा.

कीर्ति बोली जान, रहने दो. तुम्हे उस से कुछ भी कहने की ज़रूरत नही है. कुछ भी हो, वो तुमसे प्यार करती है. ये बात सुनकर, बेचारी का दिल टूट जाएगा. फिर 2-4 दिन की ही तो बात है. तुम्हारे वहाँ से वापस आते ही, वो खुद ही इन सब बातों को समझने लगेगी.

इतना बोल कर मैं सर झुका कर खड़ा हो गया. तभी बरखा दीदी मेरे पास आ गयी. उनकी आँखें अब पूरी तरह आँसुओं से भीग चुकी थी. लेकिन उन्हो ने मुस्कुरा कर, मेरे बगल मे खड़े होकर, एक हाथ मेरे बाजुओं पर लाकर, मेरे कंधे को अपने कंधे से सटाते हुए, सबसे कहा.,आदमी आदमी का बीएफ राज के मूह से, उस नर्स के लिए इतने ख़तरनाक बोल सुनकर, मैं उसके बारे मे सोचने पर मजबूर हो गया. उसकी उमर 22-23 साल के आस पास की ही होगी. उसने इस समय पटियाला सलवार सूट पहना था और जिस मे वो सच मे बहुत सुंदर लग रही थी.

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