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मारवाड़ी चोदा चोदी

मारवाड़ी चोदा चोदी, अपी ने कहा भाई जो मैं करू मना मत करना बस मेरा साथ देते रहना फिर देखना कि वो किस तरह हमारे साथ शामिल होता है अंदर से हल्की हल्की सिसकियों की आवाज़ें आ रही थी, कोई शक़ नही कैलाश चोद रहा होगा सुनैइना को, पर उसे ज़ोर से ऋषब की आवाज़ सुनाई देती है.

अंकित :- अरे इसमे मानने वाली बात क्या है नही देखता ... बोरियत हो गयी है..बार बार एक ही चीज़..(अब अंकित भी पूरा फ्रॅंक होके बोल रहा था अब जब लड़की ही खुलेआम बोल रही है तो लड़के को क्या शरम) शांति के बाल बीखरे हैं , आँचल नीचे गीरा है ..हाथ बेड पर फैले हुए ... .क्या द्रिश्य था ....शशांक उसे निहारता रहता है ..

अपी ने वापिस आ के बताया कि अम्मी जाग रही हैं मैं अपी को ले के अम्मी के रूम मे गया और अम्मी से कहा अम्मी कोई टाइम निकालो ना हमारे लिए भी मारवाड़ी चोदा चोदी रवि- अरे यार ज़यादा कुछ नही तो अपनी मम्मी की फूली हुई चूत को एक बार सोते हुए ही अपनी मुट्ठी मे भर के तो देखता तुझे नही मालूम ऐसी गदराई औरतो की चूत को अपनी मुट्ठी मे भर कर मसल्ने मे कितना मज़ा आता है,

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  1. ठीक है साहेब जैसी आपकी मर्ज़ी .. और पीछे मूड कर उस ने अपनी दूकान की रॅक से एक डाइयरी निकाली .. और उसके पन्ने पलट ते हुए मुझे नंबर दे दिया ..मैने अपनी पॉकेट डाइयरी में लिख लिया .. मोहन से पान लिया ..और ऑफीस की ओर कार घूमा ली ..
  2. विमल भी उसकी चूत को आराम से चूस्ता है , कोई दर्द भरा अहसास नही होने देता, सिर्फ़ उत्तेजना को भड़काता रहता है. ऐसा लग रहा था जैसे दोनो ही अपने काम में माहिर हों और एक दूसरे को बहुत आनंद दे रहे थे. हिंदी ब्लू पिक्चर देसी
  3. मैं तड़प उठी… मैं पेंटी को उतार फेंकना चाहती थी पर उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.. और पेंटी के गीले भाग को चूसने लगा.. फिर वह खड़ा हुआ और मेरे पीछे सट गया, उसका लिंग मुझे अपने चूतड़ों पर महसूस हो रहा था। अब मैं दूसरी तैयारी करने लगा.. वास्तव में मैं इस पल को और हसीन बनाना चाहता था, चूंकि अभी किमी को नहाना ही था तो मैंने अपना रोमांस बाथरूम में ही करने का प्लान बनाया।
  4. मारवाड़ी चोदा चोदी...हां रानी तुम भी तो कितनी मस्त चूदवा रही हो ...पूरी चूत , गांद , चूतड़ सब कुछ तुम ने मेरे हवाले कर दिया ...आआआआआः ..रानी ..मेरी रानी .... मैं चोदे जा रहा था ..चोदे जा रहा था अपी ने कहा अभी चुप चाप चलो डेरे जो ज़मीन मे 2 रूम और जानवरो के बाँधने की जगह है उस को हम लोग डेरा कहते हैं
  5. रमेश के जाने के बाद सारा परिवार नाश्ता करता है . विमल की नज़रें कामया के उपर से हट ही नही रही थी. कामया ये सोच रही थी कि दूर रहता है इसीलिए इस बार कुछ ज़यादा भावुक हो रहा है, उसे क्या मालूम था कि विमल अब उसे एक औरत की तरहा देख रहा था माँ की तरहा नही. ‘मासी आप यहाँ, मैं तो आपको ढूंडती रह गई उठने के बाद, मम्मी पापा भी तयार हो चुके हैं, फटाफट तयार हो जाओ’

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हां यार तुम ठीक बोल रही हो..मैने तुम्हें बिना कपड़ों के इतना देख लिया कि अब तू कपड़ों में अच्छी लगती ही नहीं ..... शशांक फिर छेड़ता है उसे ..

मैं : ‘माँ अब मैं बड़ी हो चुकी हूँ, और बड़ी लड़कियों के लिए माँ सबसे अच्छी दोस्त होती है, और दोस्त से कुछ छुपाया नही जाता’ मेरा चेहरा उतर चुका था. विमल सुनीता के कंधे पे अपना सर रख कर आँखें बंद कर लेता है जैसे सोने लगा हो, आर सुनीता प्यार से उसके बालों में अपनी उंगलियाँ फेरने लगती है. विमल का हाथ धीरे धीरे सुनीता की जाँघ पे चला जाता है और वो से सहलाने लगता है. सुनीता को एक झटका लगता है पर वो कुछ बोलती नही.

मारवाड़ी चोदा चोदी,रमण आज फुल मस्ती के मूड में था. वो बिस्तर से उठ कर अपनी अलमारी से रेड वाइन की बॉटल निकालता है. रमण के हाथ में बॉटल देख कर ऋतु मुस्कुरा उठती है आर रमण को छेड़ती है.

विमल समान कार की डिकी में रखता है और घर की तरफ रवाना हो जाता है. सारे रास्ते दोनो बहने अपनी बातों में मशगूल हो जाती हैं.

क्या कहा था....? शिवानी मैं तो बस सिर्फ़ बोलता जा रहा था ..मुझे कुछ होश नहीं वो क्या बोल रही थीं..कुछ याद नहीं उन्होने क्या बोला ...बता ना प्लीज़ ..বাংলাদেশী ব্লু ফিল্ম ভিডিও

पर शशांक एक बड़ी द्विविधा में फँस जाता है...वो कुछ नहीं बोल पाता , चूप रहता हुआ शिवानी की इन बातों का उसके पास कोई जवाब नहीं.. एक दिन मैं गार्डन के पास एक बेंच पर अकेले उदास बैठी थी.. मेरी नजरें एक टक जमीन को ही देख रही थी.. पता नहीं मैं वहाँ कितनी देर से बैठी थी, शायद घंटा भर तो हो ही गया रहा होगा, और यह बात मुझे तब पता चली जब सुधीर ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा- स्वाति, अब शाम हो गई है, तुम्हें घर जाना चाहिए..

शांति के अंदर भी इस सवाल ने धमाका मचा रखा था ...इन धमाकों से अपने आप को कैसे बचाए ?? ..कब तक बचाए ..??? और क्यूँ बचाए ????.इस आखरी सवाल ने उसे बूरी तरेह झकझोर दिया था .....

निशा का पूरा जिस्म अपना हाथ अपने पिता की पेंट पर पड़ते ही सिहर उठा क्योंकि दलीप का लंड पूरी तरह से तना हुआ था जो निशा को अपना हाथ वहां पर रखते ही महसूस हुआ |,मारवाड़ी चोदा चोदी मैं भी चुप हो गया किओं कि मुझे पता लग गया था कि अम्मी अभी कुछ भी नही बताएँगी बाहर निकल गया और अपने एक दोस्त के पास चला गया

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