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डॉ वसंत गोवारीकर information in marathi

डॉ वसंत गोवारीकर information in marathi, मुझे अपनी तरफ यूँ घूरता देख कर उसने झेंपते हुए अपनी आँखें नीचे कर लीं और कहा- भाई साब… हम आपके पड़ोसी हैं… एक रिश्तेदार की शादी में गए हुए थे, और आज ही लौटे हैं। करुणा-मेरी स्वीटी प्लीज़ चुप कर ना वो अभी गुस्से में है जब उसका गुस्सा ठंडा हो जाएगा तो देखना वो खुद तुम्हारे पास आएगी.

मैने कहा, मुझे नही पता, मैं अभी बहुत परेशान हूँ मुझ से ऐसी बाते मत करो, तुमने मुझे आज बुरी तरह फँसा दिया. मामी ने अपनी ऊपेर वाली जाँघ को हल्का सा ऊपेर कर लिया…जैसे ही मामी की जाँघ ऊपेर हुई…मेरा तना हुआ लंड मामी की दोनो जाँघो के बीच मे से उनकी चूत की फांकों के बिल्कुल बीचो-बीच सॅट गया….

क्या अद्भुत द्रिश्य था वो.. जब दो प्रेमियों के होठों का मिलन हो रहा था जो ना जाने कब से एक दूसरे के लिए तड़प रहे थे.. राज ने भी उससे अलग हटने की कोशिश नही की और दोनो के होंठ आपस मे गुत्थम गुत्था हो गये जैसे कि आज एक दूसरे को अपने अंदर समा लेना चाहते हों.. डॉ वसंत गोवारीकर information in marathi और मेने बाबू जी को अपनी बाहों मे कस लिया. और उनसे किसी बच्चे के तरहा चिपक गयी. बाबू जी ने मेरे होंटो को जल्दी से अपने होंटो मे ले लिया. और ज़ोर -2 से चूसने लगे. मेने भी मस्ती मे आकर अपने होंटो खोल दिए. और बाबू जी ने मेरी जीभ को चूसना चालू कर दिया. हम दोनो की जीभ एक दूसरे रगड़ खा रही थी.

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  1. मैने पूछा, जान अब हम इस सफ़र के आखरी पड़ाव पर हैं. क्या तुम फाइनल राइड के लिए तैयार हो, मैं अपना लिंग तुम्हारी योनि में डालने जा रहा हूँ
  2. हां...हां!तुम आराम करो बेटी....& कोई ज़रूरत हो तो मुझे बेझिझक बुला लेना.,रीमा ने दरवाज़ा बंद किया &रोती हुई सोफे पे जा गिरी.पहले रवि का बॉस अब ये बुड्ढ़ा.इन सबने उसे क्या कोई सड़क पे पड़ा खिलोना समझ रखा था क्या कि जिसकी मर्ज़ी हो वो उसके साथ खेल ले. பல் ஓட்டையை சரி செய்வது எப்படி
  3. काफी देर तक बातें करने के बाद हम अपने अपने घरों में चले गए और फिर रोज़ की तरह खाना वाना खा कर सोने की तैयारी… मैने कहा, तुम्हे क्या लगता है ? ये मुझे मंजूर होगा, इस से अछा तो मैं बदनाम ही हो जाउ तो ज़्यादा अछा है. कर लो तुम्हे जो करना है, आइ डॉन’ट केर.
  4. डॉ वसंत गोवारीकर information in marathi...मैं हैरान थी कि आख़िर उस धोकेबाज बिल्लू ने मुझ पर कैसा जादू कर दिया कि मैं मदहोश हो कर वाहा दरवाजे पर उशके हाथो का खिलोना बन कर खड़ी रही. बाबू जी मेरी चुचियो को कस कस के चूस रहे थे. मेरी चुचियो के निपल्स कड़े होकर कर तन चुके थे. मे मस्ती मे अहह ओह कर रही थी. और बाबू जी की पीठ पर अपने हाथों से सहला रही थी. और अपनी चूत को ऊपेर की तरफ बाबू जी के लंड पर दबाने लगी.
  5. मैने कहा, तुम अब यहा मत आना, आज मैं फँसते फँसते बची हूँ. मैं नही चाहती कि फिर से कोई तुम्हे यहा देखे. और वैसे भी मैं अब तुम्हे घर के अंदर नही घुसने दूँगी. हेलो..का-कौन है..बोलते क्यू नही?..,रीमा ने फोन रख दिया,उसे डर लग रहा था.उसके परेशान मन मे 1 बार ख़याल आया की विरेन्द्र जी को फोन करके बुला ले.उसने तय किया कि अगर 1 बार फिर वो ब्लॅंक कॉल आया तो वो अपने ससुर को फोन कर लेगी.

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वो आदमी वाहा से नही हटा, और रिक्शे के साथ-साथ चलता रहा. कितना घिनोना, चेहरा था उसका. उसे देख कर ही, उल्टी आने को हो रही थी, और ऐसा आदमी मेरे बारे मे ऐसी गंदी बाते कर रहा था, सब कुछ बर्दस्त के बाहर था. उस आदमी की हिम्मत बढ़ती ही जा रही थी, वो मेरी तरफ गंदे गंदे इशारे करने लगा.

मे अहह ओह्ह्ह नहिी बाबू जीईए अहह अहढ़ेर्र्र्र्ररर करोन्ंणणन् नाअ ओह कर रही थी…मेरी चूत जो कुछ देर पहले सूखी हुई थी…अब उसमे पानी आने लगा था…और अभी का लंड मेरी चूत मे फतच-2 के आवाज़ से अंदर बाहर होने लगा… मैं ये सुन कर हैरान हो गयी. अभीतक तो उसे मेरे पति के नाम से जीझक हो रही थी और अब वो खुद उनके बारे में पूछ रहा था.

डॉ वसंत गोवारीकर information in marathi,मे बेड के ऊपेर होकर उल्टी लेट गयी. अभी ने मेरे पेट के नीचे दो तकये लगा दिए. जिससे मेरी गांद ऊपेर की ओर निकल आई.

हेलो...हेलो...,अभी भी कोई आवाज़ नही आई.वो फोन रख वापस टीवी देखने लगी.5 मिनिट के बाद फिर से फोन बज उठा.

उस दिन मेरी जेठानी घर वापिस आ गयी….पर विजय तब तक मेरी चूत का दीवाना बन चुका था…उसे जब भी मोका मिलता वो मुझे चोद देता….पर अब वो मुझे हर बार सन्तुस्त नही कर पाता….क्योंकि हमेशा हमे किसी से पकड़े जाने का डर रहता था…ట్రిపుల్ ఎక్స్ వీడియో

वो बोला, ये सब मिल कर बताउन्गा, तुम जल्दी सूर्या होटेल के बाहर पहुँचो मैं तुम्हारा इंतेज़ार कर रहा हूँ, अगर तुमने कोई चालाकी की या फिर, ना आने की हिम्मत की तो मैं तुरंत तुम्हारी करतूत दुनिया के सामने ले आउन्गा. वो मेरे बिना कहें घर के अंदर आ गये….मे गेट पर सहमी से खड़ी देख रही थी…मुझे समझ मे नही आ रहा था कि आख़िर मे क्या करूँ

गेट बंद होने की आवाज़ आई तो दोनो अलग हो गये.दर्शन किचन मे आया तो शेखर अपने रूम मे जा चुका था.बचा काम करके रीमा भी अपने कमरे मे चली गयी थी,कितने दीनो बाद किसी मर्द के सीने से लग उसने अपनी चूत पे लंड का & चूची पे हाथ का एहसास किया था.पर अभी अपनी आग बुझाने का वक़्त नही था,सास को दवा जो पिलानी थी.

चूमते हुए शेखर नीचे उसकी गोरी गर्दन पे आया & कुच्छ देर वाहा बिताने के बाद नीचे उसकी छातियो पे झुक गया.ऊहह..!,रीमा ने अपना निचला होंठ अपने दन्तो तले दबा कर अपनी आ को रोका.उसके दिमाग़ के किसी कोने मे अभी भी ये ख़याल था कि कही उसके ससुर को उसके & शेखर के बीच के खेल का पता ना चल जाए.,डॉ वसंत गोवारीकर information in marathi ‘क्या हुआ… क्या सोचने लगे… देखा ना मुझे पता था कि आपने मुझे माफ़ नहीं किया…’ वंदना ने मेरा ध्यान तोड़ते हुए फिर से रोने वाली शक्ल बना ली।

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