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सुख म्हणजे नक्की काय असतं मालिका कलाकार

सुख म्हणजे नक्की काय असतं मालिका कलाकार, हमारी साँसें बहुत तेज़ चल रही थीं। झड़ के मैं नीलम रानी के ऊपर ही पड़ा हुआ था। नीलम रानी आँखें मींचे चुप चाप पड़ी थी और अभी अभी हुई कोमल उसकी बात बीच में ही काटती हुई बोली- तो इस बात के लिए आप मुझसे मिलने आये थे… कर्नल मान… आपकी बेचैनी देखकर मुझे लगा जैसे आप मुझ पे फिदा होकर आये हैं… कोमल अपनी बात पर हल्की सी हँसी और एक टाँग आगे करके अपने सैंडल से कर्नल कि जाँघ को छुआ।

पूरा दिन गाड़ी चलाने के बाद वो दोनो जयपुर पहुचे. आधी रात का समय हो चुका था इसलिए वो दोनो वही एक होटेल मे रुक गये. पूरी रात वही होटेल मे बिताने के बाद वो दोनो सुबह देर तक सोते रहे क्यूकी वो ना जाने कितनी देर से लगातार गाड़ी चला रहे थे. फिर मैंने उसके हाथों का मुआयना किया, बड़े सुन्दर, सलोने और सुडौल हाथ थे। मखमल सी मुलायम, लम्बी मांसल उंगलियाँ, सलीकेदार और लम्बे आयताकार सुन्दर नाखून जो बस ज़रा से ही उंगलियों से बढ़े हुए थे, त्वचा एकदम रेशम जैसी चिकनी !

इस समय कोमल के जहन में वही भीमकाय भूरा-लाल लौड़ा घूम रहा था। कोमल ने कई बार अपनी चूत में उस घोड़े के लण्ड की कल्पना की थी। कोमल का मुँह अचानक सूखने लगा और कर्नल के लण्ड के चिपचिपे सुपाड़े को अपने होठों में लेने की इच्छा तीव्र हो गयी। सुख म्हणजे नक्की काय असतं मालिका कलाकार और बोली- आअह्ह… आलोक बेटा, मैं गई… उन्म्मह… और तेज चाटो… आलोक मेरा होने वाला है… खा जाओ अपनी बुआ की फुद्दी को… इसेक साथ ही बुआ के जिश्म को झटके लगने लगे और बुआ की फुद्दी से गाढ़े और साल्टी टेस्ट के पानी का सैलाब सा निकल आया और मेरे मुँह पे फैल गया जो कि बुआ ने अपनी फुद्दी के साथ दबा रखा था।

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  1. जिससे अम्मी भी अब पूरी तरह मजा ले रही थी। अम्मी भी अब थोड़ा सा खुल गई और- हाँ आलोक, अब बहुत अच्छा लग रहा है… हाँ यहाँ से ही मसलो… उन्म्मह…
  2. ‘नहीं चंदारानी… जब उसके पीरियड होते हैं तो वह लंड को चूस चूस के खलास करती है, उसे बहुत मज़ा आता है मेरा लंड चूसने में… जब मैं झड़ता हूँ तो कुछ वह पी लेती है और कुछ वह अपने चेहरे पर मल लेती है क्रीम की तरह ! वह कहती है कि यह हर क्रीम से बेहतर होता है।’ marathi प्रजासत्ताक दिन
  3. घर के अंदर जाते हुए सजल अपना पूरा बचाव कर रहा था- आखिर तुम्हें मनीषा आंटी में क्या बुराई नज़र आती है… मुझे तो वो एक ठीक औरत लगी… ‘आ चल…आज तेरा कचूमर बना ही दूँ !’ उसका सुन्दर मुखड़ा अपने मुँह से चिपका कर मैंने उसके होंठ चूसने शुरू कर दिये और साथ ही साथ उसकी चूचियाँ दबोच कर उन्हें पूरी ताक़त से मसलने लगा।
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  5. दूध पीता, ज़बरदस्त चुदाई का मज़ा लूटता यह चूतनिवास भी तेज़ी से झड़ने की ओर बढ़ रहा था। फच फच फच फच की आवाज़ से कमर भर उठा, चंदा रानी अब बिजली की तेज़ी से अपनी कमर कुदा कुदा के धक्के मार रही थी, उसकी सांस फूल गई थी और गले से भिंची भिंची सीत्कार निकल रही थी। पायल को मेरा इस तरह करना अच्छा लगा और वो मेरे बालों में अपनी ऊँगलियां घुमाने लगी और सिसकी- हाँ भाई, चूसो इन्हें… उन्म्मह… भाई जरा जोर से चूसो… आअह्ह…

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अब मैंने अपना हाथ बढ़ा के ऋतु की गाण्ड पे रखा तो मेरी छोटी और मासूम बहन जिसको हम सब घर वाले इस गंदगी में घसीट रहे थे एकदम से काँप गई।

मुझे मालूम था कि गंदी पिक्चर भी वो कयि बार देख चुकी थी. भैया को जा कर तीन महीने बीत गये. घर में मोटा ताज़ा लंड मौज़ूद होने के बावज़ूद भी भाभी लंड की प्यास में तडप रही थी. अभी हम ये बातें ही कर रहे थे कि बापू और अम्मी बैठक में से बाहर निकल आए और अम्मी अभी नंगी ही थी और वो सीधा बाथरूम की तरफ चली गई।

सुख म्हणजे नक्की काय असतं मालिका कलाकार,नहीं, हम दोनों साथ ही नहाएंगे… यह कहते हुए कोमल अपने विशाल मम्मे झुलाती हुई सजल की ओर बढ़ी। वो काफ़ी उत्तेजित थी।

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अरे मैं तो मजाक कर रहा था, मुझे मालूम है तू बच्ची नहीं रही. और इस गीलेपन का मतलब है कि मजा आ रहा है तुझे! क्या बदमाश भाई बहन हो तुम दोनों! पर मजा क्यों आ रहा है ये तो बताओ? क्यों रे अनिल? अभी रो रहे थे, अब मजा आने लगा? चौधरी सर ने पूछा. उनकी आवाज में अब कुछ शैतानी से भरी थी. हाँ...क्यूकी सिर्फ़ वो ही एक हथियार है जिसपर त्रिकाल का काला जादू नही चलता....लेकिन वो भी अगली अमावस्या से पहले...नही तो वो तुम्हारी कुवारि बहन की बलि चढ़ा कर हमेशा के लिए अमर हो जाएगा...

यह सब जो भी है वो हमारे सपने से जुड़ा हुआ है...तो क्यू ना हम बहुत पहुचे हुए आचार्य श्री सत्य प्रकाश जी के पास चले...वो इस बारे मे ज़्यादा जानकारी रखते है... अर्जुन सोफे पर से उठते हुए बोला.

दीदी ने जब देखा कि मैं सिर्फ़ उनकी फुद्दी को हो देखे जा रहा हूँ कुछ कर नहीं रहा तो दीदी ने कहा- आलोक, क्या बात है? क्या देख रहे हो?,सुख म्हणजे नक्की काय असतं मालिका कलाकार काजल एक कोने मे बैठी सुबक्ती रही. उस कल कोठरी मे फैले अंधेरे से वो सहमी हुई थी. त्रिकाल के वहशी आदमियो ने उसके सारे कपड़े उतार के उसे नंगी कर दिया था. वो अपने योवन को अपने हाथो से समेटे सूबक रही थी.

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