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बाई आंघोळ करताना

बाई आंघोळ करताना, दोनों भाई उसकी एक-एक चूची को अपने हाथ से मसलना शुरू कर चुके थे और एक-एक हाथ से उसकी गांड के एक-एक भाग का जायजा लेने में लग गए थे. निशा- क्यों किया तुमने ऐसा राधिका.. मुझे बताना भी ज़रूरी नहीं समझा... एक पल के लिए भी नहीं सोचा कि अगर तुझे कुछ हो गया तो मैं तेरे बगैर कैसे जिउन्गि....

और फिर जोर से उछलकर हुए अपनी पावरोटी सी फूली चूत में जड़ तक बल्लू का लण्ड धॉंसकर और उसे लण्ड पर बुरी तरह रगड़ते हुए वो भी झड़ने लगी । दोनों एक दूसरे की बाहों मे पडे हॉफ रहे थे एक दूसरे की बाहों में लिपटे लिपटे ही सो गये। निशा वहीं अपनी मम्मी के गले से लिपट कर रोने लगती हैं... मम्मी अगर राधिका को कुछ हुआ तो देख लेना मैं भी अपनी जान दे दूँगी.. मैं उसके बगैर नहीं जी सकती.... वो मेरी सहेली ही नहीं मेरी जान से बढ़कर हैं... पता नहीं ये सब कैसे हो गया....

विजय मन ही मन बिहारी को गाली देता हैं. साला मदर्चोद देख लेना किसी दिन कुत्ता ये लड़की के चक्कर में साला बर्बाद हो जाएगा. साला 50 साल का हो गया मगर ऐय्याशि साले की दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही हैं. अपना तो फँसेगा साला कहीं मुझे भी ना ले डूबे. बाई आंघोळ करताना जैसे ही कृष्णा जाने के लिए मुड़ता हैं राधिका झट से उसका हाथ थाम लेती हैं. आज सब कुछ उसके साथ उल्टा होता नज़र आ रहा था. अब तक वो राधिका का हाथ पकड़ता था मगर आज राधिका ने उसका हाथ पकड़ लिया था.

व्यायामाचे फायदे सांगा

  1. हुन्ह..,शत्रुजीत 1 फीकी हँसी हंसा,..झगड़े के लिए भी दिल मे कुच्छ भावनाए होनी चाहिए..हम दोनो के बीच तो इतना सा भी लगाव नही था,लेकिन हुमारी बहस ज़रूर हुई थी.
  2. ध्यान रहे,मोहसिन.हम तीनो के अलावा & कोई ना जानने पाए.मैने शत्रुजीत सिंग को भी इस बारे मे कुच्छ नही बताया है. मराठी भाषा दिवस शुभेच्छा
  3. मैं इस लिए उसे कुछ नही बोल पाई क्यों कि अब मेरा इस दुनिया में कोई नही था जो मेरा अपना हो. कहते हैं ना इंसान की असली परख बुरे दिन में ही होती है. जब मेरा बुरा समय आया तब सब ने अपने हाथ खीच लिए. तब मैने भी ये सोच लिया की मर जाउन्गि मगर उनके दरवाज़े पर पाँव नही रखूँगी. रजत- हाँ दीदी… आज हम दोनों भाई तुम्हें इतना चोदेंगे कि तुम्हें अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए किसी और का चेहरा और लंड देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी. हम दोनों भाई मिलकर तुम्हारी चूत के चीथड़े-चीथड़े कर देंगे.
  4. बाई आंघोळ करताना...बिहारी- मैने कहा ना काजीरी कि ये लड़की रंडी नहीं हैं. अगर मेरे पास नयी कोई माल आएगी तो मैं तेरे पास भिजवा दूँगा. तभी विजय बीच में बोल पड़ता हैं. काजीरी अगर तू इस लड़की के पूरे 5 लाख देने को तैयार हैं तो मुझे ये सौदा मंज़ूर हैं. मयूरी- हाँ… और इसीलिए दोनों आपको एक साथ चोदना चाहते हैं… एक आपकी गांड में और एक आपकी चूत में लंड डालकर आपको चोदना चाहते हैं.
  5. विवेक उसे कभी भी सुबह को नही चोद्ता था,दोनो को काम पे जाने की इतनी जल्दी होती थी कि वो उठ के बस तैय्यार हो कोर्ट पहुँचने की हड़बड़ाहट मे रहते थे.मगर उसके तीनो आशिक़ तो जैसे उसे बस दिन हो या रात अपने बिस्तर मे अपनी बाहो मे सुलाए रखना चाहते थे! अगले दिन सुबह में विक्रम जल्दी उठकर अपने कॉचिंग क्लास चला गया. मयूरी हॉल में बैठकर टीवी देख रही थी और रजत अपने कमरे में लेटा था. तभी शीतल झाड़ू लगाने के लिए उस कमरे में गयी.

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मोहन लाल- अच्छी बात है.. अब अपने ससुर से बिल्कुल अपने बाप जैसे प्यार लो. आओ और मेरा लंड अपनी चूत में ले लो.

राहुल फिर अपना हाथ आगे लेजा कर निशा की पैंटी भी झट से उसके बदन से अलग कर देता हैं ...थोड़ी देर बाद निशा की काली पैंटी भी बिस्तेर पर पड़ी रहती हैं....इस वक़्त निशा राहुल के सामने पूरी नंगी हालत में थी ...उसके बदन पर एक कपड़ा नहीं था...था तो बस मन्गल्सुत्र.... राधिका- तुमने ये कैसे सोच लिया कि मैं नही आउन्गि. ज़रूर आउन्गि. और तुमसे ज़्यादा मुझे खुशी होगी. मुझे उस दिन का बेसब्री से इंतेज़ार रहेगा.............................................

बाई आंघोळ करताना,विजय- चल तू पूरा मूह खोल मैं अब तेरे मूह में अपना पूरा लंड डालूँगा. इतना कहकर विजय खड़ा हो जाता है और मोनिका को सोफे पर पीठ के बेल लेटा देता है और वो सामने से आकर अपना लंड मोनिका के मूह में डाल देता है. अब मोनिका भी धीरे धीरे विजय का लंड पूरा अपने मूह में लेने लगती है.

बीवी की मौत के बाद से शत्रुजीत काफ़ी परेशान था & उसका हमेशा मुस्कुराता चेहरा अब बहुत तनाव भरा लगता था.कामिनी जानती थी की अभी भी उसकी बेरूख़ी इसी वजह से थी.10 दिन से उपर हो गये थे नंदिता की मौत को,अब वक़्त आ गया था कि शत्रुजीत वापस पहले की तरह हो जाए.

मोहन लाल- अच्छी बात है.. अब अपने ससुर से बिल्कुल अपने बाप जैसे प्यार लो. आओ और मेरा लंड अपनी चूत में ले लो.இயற்கை புகைப்படம்

कृष्णा चौंकते हुए- ये...........मेरे दोस्त का हैं. वो मुझे दे कर गया था कह रहा था एक दो दिन में ले लूँगा. इसमें उसके कुछ कपड़े वगेरह हैं. उनका बस चलता तो वो वैसे ही उसकी चूत मे उंगलिया घुसा देते मगर कामिनी की कसी पॅंट उनकी उंगलियो & चूत के बीच रुकावट बनी हुई थी.ए.पी.कॉलेज तक पहुँचते-2 कामिनी की चूत से च्छुटे पानी ने उसकी पॅंटी को चूत से बिल्कुल चिपका लिया था & चंद्रा साहब का अंडरवेर भी उनके प्रेकुं से गीला हो गया था.

विजय- साबाश मेरी रांड़ तूने तो मेरे जूते चमका दिए. अब से मैं तुझसे ही अपने जूते सॉफ कराउन्गा. मोनिका उसको घूर कर देखती है मगर कुछ नही बोलती.

ऑब्जेक्षन,मिलर्ड!,कामिनी की आवाज़ खचाखच भरे कोर्टरूम मे गूँजी,अभी तक जुर्म साबित नही हुआ है,युवर ऑनर & उसके पहले मेरे मुवक्किल से ऐसे सवाल नही किए जा सकते.,बाई आंघोळ करताना और कामया एक झटके से उठी और जल्दी ही भीमा चाचा के ऊपर सावर हो गई फिर से उसकी गोद में अपनी दोनों जाँघो को चारो ओर फैलाकर अपनी योनि के द्वार को अपने सनम के लिए खोलकर अपनी बाहों को खोलकर अपने जन्नत के सफर पर अगली यात्रा की ओर चलने को फिर से तैयार थी

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